बाह (आगरा)। आगरा जनपद की बाह तहसील से निकलकर एक युवा आज अपने सामाजिक कार्यों के बल पर न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे देश में पहचान बना रहा है। यह पहचान मिली है विकारा फाउंडेशन के निरंतर और समर्पित प्रयासों से, जो समाज सुधार, शिक्षा सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे अहम क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभा रहा है।
विकारा फाउंडेशन के संस्थापक अतुल पचौरी, जो पेशे से विधि (कानून) के छात्र और समाजसेवी हैं, ने कम उम्र में ही सामाजिक असमानता, शिक्षा की कमी और पर्यावरणीय संकट जैसी गंभीर समस्याओं को समझते हुए इस संस्था की नींव रखी। उनका मानना है कि शिक्षित समाज, जागरूक नागरिक और सुरक्षित पर्यावरण ही किसी भी राष्ट्र की मजबूत आधारशिला होते हैं।फाउंडेशन द्वारा संचालित शिक्षा केंद्रों में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। यहां पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि बच्चे आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विकारा फाउंडेशन ने स्वच्छता अभियान, यमुना व सार्वजनिक स्थलों पर क्लीन-अप ड्राइव, वृक्षारोपण कार्यक्रम और पर्यावरण जागरूकता अभियानों के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इन अभियानों में युवाओं और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी से समाज में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो रही है।दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए विकारा फाउंडेशन अब एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इस योजना के तहत वाहन उत्सर्जन, निर्माण कार्य, औद्योगिक प्रदूषण और कचरा जलाने जैसे कारणों पर अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान सुझाए जाएंगे। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और रिहायशी इलाकों में जागरूकता कार्यक्रम, हरित क्षेत्रों का विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा।इन प्रयासों की दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने विशेष रूप से सराहना की है। उन्होंने कहा कि विकारा फाउंडेशन जैसे संगठन केवल अभियान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अतुल पचौरी के नेतृत्व को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।बाह का यह लाल आज यह साबित कर रहा है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सेवा भाव से सीमित संसाधनों में भी बड़ा सामाजिक परिवर्तन संभव है। विकारा फाउंडेशन के माध्यम से बाह का नाम आज देशभर में सकारात्मक बदलाव, युवा नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में स्थापित हो रहा है।
देश में नाम रोशन कर रहा ‘बाह का लाल’, समाज, शिक्षा और पर्यावरण के लिए बना बदलाव का प्रतीक
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Published on: 05-01-2026

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